प्रसाद गुण के उदाहरण - prashad gun ka udaharan
प्रसाद गुण के उदाहरण
प्रसाद गुण काव्य का वह गुण है जिसमें भाषा अत्यंत सरल, स्पष्ट और सहज होती है। ऐसी भाषा जिसे पढ़ते ही उसका अर्थ तुरंत समझ में आ जाए, उसे प्रसाद गुण कहा जाता है। इसमें कठिन शब्द या उलझे हुए वाक्य नहीं होते।
नीचे प्रसाद गुण के कुछ प्रसिद्ध और परीक्षा में उपयोगी उदाहरण दिए जा रहे हैं।
उदाहरण 1
"करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात ते, सिल पर परत निसान।।"
यह दोहा कबीरदास का है। इसमें सरल शब्दों में बताया गया है कि लगातार अभ्यास करने से मूर्ख व्यक्ति भी बुद्धिमान बन सकता है। भाषा बहुत सरल है, इसलिए इसमें प्रसाद गुण है।
उदाहरण 2
"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।"
इस दोहे में यह बताया गया है कि जब मनुष्य दूसरों में बुराई खोजता है तो उसे कोई बुरा नहीं मिलता, लेकिन जब वह अपने मन को देखता है तो उसे अपनी ही कमी दिखाई देती है। सरल भाषा के कारण इसमें प्रसाद गुण स्पष्ट दिखाई देता है।
उदाहरण 3
"धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।"
इसमें धैर्य का महत्व बताया गया है। हर काम समय आने पर ही पूरा होता है। भाषा सीधी और स्पष्ट है, इसलिए यह प्रसाद गुण का अच्छा उदाहरण है।
उदाहरण 4
"रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।।"
इस दोहे में रहीम ने सम्मान और मर्यादा का महत्व बताया है। भाषा सरल है और अर्थ तुरंत समझ में आता है, इस कारण इसमें प्रसाद गुण मिलता है।
उदाहरण 5
"ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय।।"
इस दोहे में मधुर वाणी का महत्व बताया गया है। ऐसे शब्द बोलने चाहिए जो दूसरों को सुख दें। सरल और स्पष्ट भाषा होने के कारण इसमें प्रसाद गुण है।
उदाहरण 6
"परहित सरिस धरम नहि भाई,
पर पीड़ा सम नहि अधमाई।"
इस पंक्ति में दूसरों की भलाई को सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। भाषा सहज है और अर्थ तुरंत समझ में आता है, इसलिए यह प्रसाद गुण का उत्तम उदाहरण है।
उदाहरण 7
"सत्य की राह पर चलना,
जीवन को उजाला देता है।"
इस पंक्ति में सत्य के महत्व को सरल भाषा में बताया गया है। सरलता और स्पष्टता के कारण इसमें प्रसाद गुण दिखाई देता है।
उदाहरण 8
"मेहनत करने वाला मनुष्य,
एक दिन अवश्य सफल होता है।"
इस पंक्ति में परिश्रम का महत्व बताया गया है। भाषा सीधी और स्पष्ट है, इसलिए यह भी प्रसाद गुण का उदाहरण है।