हिंदी वर्णमाला का परिचय

Arpit Nageshwar
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हिंदी वर्णमाला – परिभाषा, वर्ण-क्रम, वर्गीकरण और पूरी जानकारी

वर्ण किसे कहते हैं (परिभाषा)

भाषा की सबसे छोटी और अविभाज्य ध्वनि इकाई को वर्ण कहते हैं। जब किसी शब्द को बोलते-बोलते इतना छोटा तोड़ दिया जाए कि आगे और विभाजन संभव न रहे, तो जो अंश बचता है वही वर्ण है। जैसे 'घर' शब्द को घ् + अ + र् + अ में तोड़ा जा सकता है — यहाँ घ और र अलग-अलग वर्ण हैं। लिखित रूप में हर वर्ण को एक निश्चित संकेत (अक्षर) देकर दिखाया जाता है।

वर्णमाला किसे कहते हैं (परिभाषा)

किसी भाषा में प्रयुक्त सभी वर्णों के व्यवस्थित और निश्चित क्रम में रखे गए समूह को वर्णमाला कहते हैं। सरल शब्दों में, भाषा की हर ध्वनि (sound) को एक चिह्न देकर एक तय क्रम में सजा दिया जाए, तो वही संग्रह वर्णमाला कहलाता है। हिंदी वर्णमाला इसी वर्ण-समूह का व्यवस्थित रूप है, जिस पर हिंदी की सम्पूर्ण लेखन और उच्चारण-प्रणाली टिकी है।

हिंदी वर्णमाला के भाग (कितने भाग होते हैं)

हिंदी वर्णमाला मुख्यतः तीन भागों में बँटी है:

  • स्वर — जिनका उच्चारण बिना किसी रुकावट के होता है
  • व्यंजन — जिनका उच्चारण स्वर की सहायता से पूरा होता है
  • आयोगवाह और संयुक्त वर्ण — अं, अः तथा क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे मिश्रित वर्ण
भागअर्थभूमिका
स्वरबिना रुकावट बोले जाने वाले वर्णहर शब्दांश (syllable) का आधार
व्यंजनस्वर की सहायता से बोले जाने वाले वर्णशब्द-निर्माण की मुख्य इकाई

स्वर (Vowels) — परिभाषा, संख्या और भेद

जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी रुकावट के, स्वतंत्र रूप से होता है, वे स्वर कहलाते हैं। मूल स्वर ग्यारह माने जाते हैं — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। इनमें अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) को जोड़कर कुछ व्याकरण-ग्रंथ स्वरों की संख्या 13 भी मानते हैं, हालाँकि ये दोनों वास्तव में आयोगवाह (स्वर और व्यंजन के बीच की ध्वनियाँ) की श्रेणी में आते हैं।

उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों को तीन भागों में बाँटा जाता है — ह्रस्व (अ, इ, उ, ऋ), दीर्घ (आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ) और प्लुत (पुकारने में प्रयुक्त दीर्घतम ध्वनि, जैसे 'ओ३म्')।

व्यंजन (Consonants) — परिभाषा, संख्या और भेद

जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता के बिना पूरा नहीं होता, उन्हें व्यंजन कहते हैं। हिंदी में मूल व्यंजन 33 माने जाते हैं; इनमें क्ष, त्र, ज्ञ, श्र जैसे संयुक्त व्यंजन जोड़ने पर कुल संख्या 39 तक पहुँचती है।

  • क, ख, ग, घ, ङ
  • च, छ, ज, झ, ञ
  • ट, ठ, ड, ढ, ण
  • त, थ, द, ध, न
  • प, फ, ब, भ, म
  • य, र, ल, व
  • श, ष, स, ह
  • क्ष, त्र, ज्ञ (संयुक्त व्यंजन)

वर्णों का वर्गीकरण (उच्चारण-स्थान के आधार पर)

व्यंजनों को मुँह के जिस भाग से बोला जाता है, उस उच्चारण-स्थान (Place of Articulation) के आधार पर पाँच वर्गों में बाँटा गया है:

वर्गअक्षरउच्चारण स्थान
क-वर्गक, ख, ग, घ, ङकंठ
च-वर्गच, छ, ज, झ, ञतालु
ट-वर्गट, ठ, ड, ढ, णमूर्धा
त-वर्गत, थ, द, ध, नदंत
प-वर्गप, फ, ब, भ, मओष्ठ

अवर्गीय व्यंजन

जो व्यंजन इन पाँच वर्गों में नहीं आते, उन्हें अवर्गीय व्यंजन कहा जाता है — य, र, ल, व (अंतःस्थ) तथा श, ष, स, ह (ऊष्म), साथ ही क्ष, त्र, ज्ञ जैसे संयुक्त व्यंजन भी इसी श्रेणी में रखे जाते हैं।

वर्ण-क्रम किसे कहते हैं

वर्णमाला में सभी वर्णों को उच्चारण-स्थान और उच्चारण-विधि के आधार पर एक निश्चित, तार्किक क्रम में रखा जाता है — इसी व्यवस्थित क्रम को वर्ण-क्रम कहा जाता है। सबसे पहले स्वर आते हैं, क्योंकि बिना स्वर के कोई ध्वनि पूरी नहीं बनती; उसके बाद व्यंजन कंठ से ओष्ठ तक के क्रम में — यानी जीभ जहाँ से चलना शुरू करती है (कंठ) वहाँ से आगे बढ़ते हुए होंठ तक — व्यवस्थित किए जाते हैं। यह क्रम मनमाना नहीं बल्कि ध्वनि-विज्ञान पर आधारित है।

व्यंजन और मात्रा का मेल

जब कोई स्वर किसी व्यंजन के साथ मिलकर बोला जाता है, तो उसका संक्षिप्त रूप व्यंजन के साथ जोड़ा जाता है — इसी चिह्न को मात्रा कहते हैं। अ को छोड़कर बाकी सभी स्वरों की अपनी मात्रा होती है।

स्वरमात्राउदाहरण
का, चा, जा
िकि, गि, ति
की, पी, ली
कु, पु, सु
कू, दू, भू
के, मे, से

वर्ण-विच्छेद

किसी शब्द को उसके मूल वर्णों में अलग-अलग तोड़ने की प्रक्रिया को वर्ण-विच्छेद कहते हैं। इससे शब्द की बनावट स्पष्ट होती है और वर्तनी (spelling) की गलतियाँ कम होती हैं।

  • कक्षा → क् + अ + क् + ष् + आ
  • ज्ञान → ज् + ञ् + आ + न्
  • विश्व → व् + इ + श् + व्

त्वरित नोट्स (Quick Revision)

  • वर्ण = भाषा की सबसे छोटी ध्वनि इकाई
  • वर्णमाला = वर्णों का व्यवस्थित समूह
  • स्वर = 11 (कुछ ग्रंथों में अं, अः जोड़कर 13)
  • व्यंजन = 33 मूल + 4 संयुक्त (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र)
  • व्यंजनों के 5 उच्चारण-स्थान आधारित वर्ग — क, च, ट, त, प वर्ग
  • वर्ण-क्रम स्वर से शुरू होकर कंठ से ओष्ठ तक के व्यंजनों में पूरा होता है
Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience