स्वर व व्यंजनों का वर्गीकरण

Arpit Nageshwar
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स्वर और व्यंजन का वर्गीकरण – परिभाषा, प्रकार और अंतर

हिंदी भाषा की हर ध्वनि दो हिस्सों में बँटी होती है — स्वर और व्यंजन। स्वर वे ध्वनियाँ हैं जो बिना किसी रुकावट के मुँह से सीधी निकलती हैं, जबकि व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिनका उच्चारण हवा के रुकने और टकराने से बनता है और जिन्हें बोलने के लिए स्वर की मदद जरूरी होती है। यही एक लाइन कई बार पूरे टॉपिक की नींव समझने के लिए काफी होती है, लेकिन exam में इससे आगे भी बहुत कुछ पूछा जाता है — इसलिए आज हम इसे शुरू से आखिर तक, बहुत साफ भाषा में समझेंगे।

स्वर और व्यंजन की परिभाषा

स्वर की परिभाषा: स्वर वे स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं जिनका उच्चारण करते समय हवा गले से मुँह तक बिना किसी अवरोध के बाहर निकलती है। इन्हें बिना किसी दूसरी ध्वनि की मदद के अकेले बोला जा सकता है, इसलिए इन्हें भाषा की मूल इकाई माना जाता है।

व्यंजन की परिभाषा: व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिनका उच्चारण करते समय हवा मुँह के किसी हिस्से — होंठ, दाँत, तालु या जीभ — से टकराकर निकलती है। व्यंजन का पूरा उच्चारण तभी होता है जब उसमें कोई स्वर जुड़ता है, इसी वजह से इन्हें आश्रित ध्वनि कहा जाता है।

स्वर के प्रकार और संख्या

हिंदी में मानक रूप से 11 मूल स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) माने जाते हैं। इनके साथ दो आयोगवाह — अं और अः — भी जोड़े जाते हैं, जिससे कुल स्वरों की संख्या 13 हो जाती है। उच्चारण के समय लगने वाले समय के आधार पर स्वरों को तीन भागों में बाँटा जाता है:

  • ह्रस्व स्वर — जिनके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है: अ, इ, उ, ऋ
  • दीर्घ स्वर — जिनके उच्चारण में ह्रस्व स्वर से लगभग दोगुना समय लगता है: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
  • प्लुत स्वर — जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय लगता है, जैसे किसी को दूर से पुकारते समय "ओ३म्" या "राऽऽम" बोलना

ध्वनि की बनावट के आधार पर इन्हें मुख्य स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ), संयुक्त स्वर (ए, ऐ, ओ, औ — जो दो स्वरों के मेल से बनते हैं) और विशेष स्वर (ऋ, अं, अः) में भी बाँटा जाता है।

स्वरों का वर्गीकरण (उच्चारण समय के आधार पर) ह्रस्व स्वर अ, इ, उ, ऋ सबसे कम समय दीर्घ स्वर आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ लगभग दोगुना समय प्लुत स्वर जैसे "राऽऽम" सबसे अधिक समय कुल 13 स्वर = 11 मूल स्वर + 2 आयोगवाह (अं, अः)

व्यंजन के प्रकार और संख्या

हिंदी वर्णमाला में कुल 33 मूल व्यंजन (क से ह तक) माने जाते हैं। इसके अलावा क्ष, त्र, ज्ञ को संयुक्त व्यंजन कहा जाता है, जो दो व्यंजनों के मेल से बनते हैं — इन्हें जोड़ने पर कुछ किताबों में कुल संख्या 36 तक भी बताई जाती है, लेकिन exam के लिए 33 वाला आँकड़ा ही मानक उत्तर माना जाता है।

वर्ग व्यंजन
क वर्ग क, ख, ग, घ, ङ
च वर्ग च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग त, थ, द, ध, न
प वर्ग प, फ, ब, भ, म

इनके अलावा तीन विशेष श्रेणियाँ याद रखनी जरूरी हैं — अंतस्थ व्यंजन (य, र, ल, व), ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) और अनुनासिक व्यंजन (ङ, ञ, ण, न, म)। ये तीनों exam में सबसे ज्यादा पूछे जाने वाली श्रेणियाँ हैं।

वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है

व्यंजनों का वर्गीकरण केवल याद करने के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि यह इस बात पर आधारित है कि ध्वनि मुँह के किस हिस्से से और किस तरीके से बन रही है। इसे मुख्य रूप से दो आधारों पर समझा जाता है।

1. उच्चारण स्थान के आधार पर

स्थान व्यंजन उदाहरण शब्द
कण्ठ (गला) क, ख, ग, घ, ङ कबूतर, घर
तालु च, छ, ज, झ, ञ चम्मच, झंडा
मूर्धा ट, ठ, ड, ढ, ण टमाटर, ढोल
दन्त (दाँत) त, थ, द, ध, न दाल, नल
ओष्ठ (होंठ) प, फ, ब, भ, म पानी, भालू
उच्चारण स्थान के आधार पर व्यंजन कण्ठ क ख ग घ ङ तालु च छ ज झ ञ मूर्धा ट ठ ड ढ ण दन्त त थ द ध न ओष्ठ प फ ब भ म गले से होंठ तक — ध्वनि जितना आगे बनती है, वर्ग उतना बदलता जाता है

2. उच्चारण ढंग के आधार पर

हवा किस तरह से रुककर या रगड़ खाकर बाहर निकलती है, इसी के आधार पर यह वर्गीकरण होता है:

  • स्पर्श व्यंजन — जहाँ हवा पूरी तरह रुककर झटके से निकलती है, जैसे क, प, त
  • ऊष्म व्यंजन — जहाँ हवा रगड़ खाकर निकलती है, जैसे श, स, ह
  • अंतस्थ व्यंजन — जो स्पर्श और स्वर के बीच की स्थिति रखते हैं, जैसे य, र, ल, व

exam में इसी टॉपिक से जुड़े सवाल यह भी पूछते हैं कि किसी शब्द का कौन-सा व्यंजन कण्ठ्य है या कौन-सा ऊष्म है — इसलिए ऊपर दी गई दोनों तालिकाओं को एक साथ याद रखना फायदेमंद रहता है।

स्वर और व्यंजन में अंतर

बहुत से students स्वर और व्यंजन को अलग-अलग तो पढ़ लेते हैं, लेकिन exam में जब दोनों के बीच का अंतर पूछा जाता है तो confuse हो जाते हैं। नीचे दी गई तालिका इस confusion को हमेशा के लिए खत्म कर देगी।

आधार स्वर व्यंजन
उच्चारण में रुकावट हवा बिना रुके सीधी निकलती है हवा किसी न किसी अंग से टकराकर निकलती है
स्वतंत्रता अकेले बोले जा सकते हैं बिना स्वर के पूरा उच्चारण नहीं होता
कुल संख्या 13 (11 मूल + 2 आयोगवाह) 33 मूल व्यंजन
उदाहरण अ, आ, इ, ई, उ क, ख, ग, च, ट
निर्भरता स्वतंत्र ध्वनि आश्रित ध्वनि (स्वर पर निर्भर)

आसान शब्दों में कहें तो — स्वर भाषा की जान हैं और व्यंजन उसका ढाँचा। स्वर अकेले शब्द नहीं बना सकते और व्यंजन अकेले बोले नहीं जा सकते; दोनों मिलकर ही एक पूरा और अर्थपूर्ण शब्द बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

स्वर और व्यंजन किसे कहते हैं?
जिन ध्वनियों का उच्चारण बिना किसी रुकावट के होता है उन्हें स्वर कहते हैं, और जिन ध्वनियों का उच्चारण हवा के किसी अंग से टकराने पर होता है उन्हें व्यंजन कहते हैं।
हिंदी में कुल कितने स्वर होते हैं?
हिंदी में 11 मूल स्वर होते हैं (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ), और अं, अः को मिलाने पर कुल संख्या 13 हो जाती है।
हिंदी में कुल कितने व्यंजन होते हैं?
हिंदी में 33 मूल व्यंजन होते हैं। क्ष, त्र, ज्ञ जैसे संयुक्त व्यंजनों को मिलाने पर कुछ किताबों में यह संख्या 36 तक बताई जाती है।
स्वर और व्यंजन में क्या अंतर है?
स्वर स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं जो बिना रुकावट के निकलती हैं, जबकि व्यंजन आश्रित ध्वनियाँ हैं जिनका पूरा उच्चारण स्वर की मदद से ही होता है।
व्यंजनों का वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है?
व्यंजनों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो आधार पर होता है — उच्चारण स्थान (कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ) और उच्चारण ढंग (स्पर्श, ऊष्म, अंतस्थ)।
ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत स्वर में क्या अंतर है?
ह्रस्व स्वर सबसे कम समय में बोले जाते हैं, दीर्घ स्वर उनसे लगभग दोगुने समय में, और प्लुत स्वर सबसे अधिक समय में बोले जाते हैं, जैसे किसी को दूर से पुकारते समय।
अंतस्थ व्यंजन और ऊष्म व्यंजन में क्या फर्क है?
अंतस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) स्वर और व्यंजन के बीच की ध्वनियाँ मानी जाती हैं, जबकि ऊष्म व्यंजन (श, ष, स, ह) में हवा रगड़ खाकर बाहर निकलती है।

निष्कर्ष

स्वर और व्यंजन हिंदी वर्णमाला की नींव हैं, और इनका वर्गीकरण समझ लेने के बाद संधि, समास, वर्तनी जैसे बाकी grammar topics भी आसान लगने लगते हैं। संक्षेप में याद रखें — स्वर कुल 13 हैं और स्वतंत्र होते हैं, व्यंजन कुल 33 हैं और स्वर पर निर्भर होते हैं, और इनका वर्गीकरण उच्चारण स्थान व उच्चारण ढंग के आधार पर किया जाता है। ऊपर दी गई तालिकाओं को एक बार खुद अपनी भाषा में दोहरा लें, यह टॉपिक हमेशा के लिए याद हो जाएगा।

Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience