हिंदी वर्णमाला वर्ण-व्यवस्था

Arpit Nageshwar
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हिंदी वर्णमाला और वर्ण-व्यवस्था — परिभाषा, वर्गीकरण एवं परीक्षा नोट्स

यह लेख RPSC सहित सभी सरकारी परीक्षाओं (SSC, UP Police, MPPSC, Teaching Exams, State Level Exams) की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए है। यहाँ हिंदी व्याकरण के वर्ण, वर्णमाला और वर्ण-व्यवस्था (वर्ण विचार) से जुड़े सभी बिंदुओं को परिभाषा, वर्गीकरण और तालिकाओं के साथ स्पष्ट किया गया है, ताकि परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सीधा और सटीक उत्तर मिल सके।

वर्ण की परिभाषा (वर्ण किसे कहते हैं?)

भाषा की सबसे छोटी, अविभाज्य ध्वनि इकाई को वर्ण कहते हैं। जिसके और टुकड़े नहीं किए जा सकते, वही वर्ण है। जैसे — "घर" शब्द दो वर्णों "घ" और "र" (मात्रा सहित) से मिलकर बना है।

वर्ण दो प्रकार के होते हैं:

  • स्वर — जिनके उच्चारण में किसी अन्य वर्ण की सहायता नहीं लेनी पड़ती।
  • व्यंजन — जिनके उच्चारण में स्वर की सहायता आवश्यक होती है।

वर्णमाला की परिभाषा (वर्णमाला किसे कहते हैं?)

किसी भाषा के समस्त वर्णों के व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिंदी वर्णमाला में स्वर और व्यंजन दोनों सम्मिलित हैं, और इन्हें एक निश्चित क्रम में रखा गया है — ठीक वैसे ही जैसे अंग्रेज़ी में A to Z का क्रम होता है।

वर्ण-व्यवस्था (वर्ण विचार / वर्ण-क्रम) किसे कहते हैं?

वर्णों को एक निश्चित, वैज्ञानिक क्रम में व्यवस्थित करना वर्ण-व्यवस्था कहलाता है। व्याकरण की पुस्तकों में इसे वर्ण विचार और परीक्षाओं में कई बार वर्ण-क्रम के नाम से भी पूछा जाता है — तीनों शब्द एक ही अवधारणा को दर्शाते हैं।

यह क्रम मनमाना नहीं है — यह ध्वनि-विज्ञान (Phonetics) पर आधारित है: वर्ण बोलते समय हवा कहाँ से गुज़रती है, जीभ और होंठ की स्थिति क्या रहती है — इन्हीं आधारों पर वर्णों को क्रमबद्ध किया गया है।

क्रम इस प्रकार है: स्वर → व्यंजन → आयोगवाह → संयुक्त वर्ण

वर्णों का वर्गीकरण

भेद परिभाषा
स्वर (Swar) स्वतंत्र उच्चारण वाले वर्ण
व्यंजन (Vyanjan) स्वर की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण

स्वर — परिभाषा, संख्या और भेद

हिंदी में 11 मूल स्वर माने जाते हैं। कुछ पुस्तकों में अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) को भी स्वर के साथ गिनकर संख्या 13 बता दी जाती है — परीक्षा में दोनों संख्याएँ पूछी जा सकती हैं, इसलिए यह अंतर समझ लेना ज़रूरी है:

  • 11 स्वर — अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
  • 13 गिनने पर — उपरोक्त 11 + अं (अनुस्वार) + अः (विसर्ग)
स्वर उच्चारण उदाहरण
aअनार
aaआम
iइमली
eeईंट
uउल्लू
ooऊँट
riऋषि
eएक
aiऐनक
oओस
auऔरत

स्वरों के भेद (मात्रा की दृष्टि से)

  • ह्रस्व स्वर (एक मात्रा में बोले जाएँ) — अ, इ, उ, ऋ
  • दीर्घ स्वर (दोगुने समय में बोले जाएँ) — आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ
  • प्लुत स्वर (ह्रस्व से तीन गुना समय) — बुलाने/पुकारने में प्रयुक्त, जैसे "राऽऽम"

संयुक्त स्वर

दो स्वरों के मेल से बने स्वर — ए, ऐ, ओ, औ संयुक्त स्वर कहलाते हैं।

व्यंजन — परिभाषा, संख्या और भेद

व्यंजनों की कुल संख्या पर परीक्षाओं में तीन अलग-अलग आँकड़े पूछे जाते हैं — तीनों याद रखें:

प्रकार संख्या वर्ण
मूल व्यंजन 33 क से ह तक (वर्गों + अंतस्थ + ऊष्म में विभाजित)
उत्क्षिप्त/द्विगुण व्यंजन 2 ड़, ढ़
संयुक्त व्यंजन 4 क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र)
कुल (कुछ पुस्तकों अनुसार) 39 33 + 2 + 4

वर्ग-व्यवस्था (33 मूल व्यंजन का विभाजन)

वर्ग अक्षर
क-वर्गक, ख, ग, घ, ङ
च-वर्गच, छ, ज, झ, ञ
ट-वर्गट, ठ, ड, ढ, ण
त-वर्गत, थ, द, ध, न
प-वर्गप, फ, ब, भ, म
अंतस्थय, र, ल, व
ऊष्मश, ष, स, ह

उच्चारण-स्थान के अनुसार व्यंजनों का वर्गीकरण

बोलते समय जीभ जिस स्थान को छूती/निकट होती है, उस आधार पर यह वर्गीकरण होता है — परीक्षाओं में सीधे पूछा जाता है:

उच्चारण स्थान नाम वर्ण
कंठ (गला)कंठ्यक, ख, ग, घ, ङ, अ, आ, ह
तालुतालव्यच, छ, ज, झ, ञ, इ, ई, य, श
मूर्धामूर्धन्यट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष
दाँत/दंतमूलदंत्य (वर्त्स्य भी कहते हैं)त, थ, द, ध, न, ल, स
होंठओष्ठ्यप, फ, ब, भ, म, उ, ऊ
दाँत + होंठदंतोष्ठ्यव, फ (कुछ मतों में)
नासिकाअनुनासिकङ, ञ, ण, न, म

नोट: त-वर्ग को कुछ ध्वनि-विज्ञान की पुस्तकों में वर्त्स्य (Alveolar) भी कहा जाता है, क्योंकि उच्चारण दाँत की जड़ (दंतमूल) से होता है — "दंत्य" और "वर्त्स्य" एक ही वर्ग के लिए प्रयुक्त दो नाम हैं।

घोष–अघोष वर्गीकरण

स्वर तंत्रियों के कंपन के आधार पर:

  • अघोष (कंपन नहीं) — वर्ग का पहला व दूसरा वर्ण (क, ख / च, छ / ट, ठ / त, थ / प, फ) + श, ष, स
  • घोष (कंपन होता है) — वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण (ग, घ, ङ / ज, झ, ञ आदि) + सभी स्वर + य, र, ल, व, ह

अल्पप्राण–महाप्राण वर्गीकरण

साँस के दबाव (प्राण वायु) के आधार पर:

अल्पप्राण (कम हवा) महाप्राण (अधिक हवा)

नियम: प्रत्येक वर्ग का पहला, तीसरा, पाँचवाँ वर्ण अल्पप्राण; दूसरा और चौथा वर्ण महाप्राण होता है।

आयोगवाह वर्ण

स्वर और व्यंजन के बीच आने वाले वर्ण, जिनका उच्चारण-स्थान निश्चित नहीं होता:

  • — अनुस्वार
  • — विसर्ग
  • — अनुनासिक (चंद्रबिंदु)

मात्रा प्रणाली

मात्रा संबंधित स्वर
ि

(अ की कोई मात्रा नहीं होती — यह स्वतः निहित रहता है।)

त्वरित रिवीजन नोट्स

  • वर्ण = भाषा की सबसे छोटी ध्वनि इकाई
  • वर्णमाला = वर्णों का व्यवस्थित समूह
  • वर्ण-व्यवस्था = वर्ण विचार = वर्ण-क्रम (तीनों समान)
  • स्वर = 11 (या 13, अं-अः सहित)
  • व्यंजन = 33 मूल + 2 उत्क्षिप्त (ड़,ढ़) + 4 संयुक्त (क्ष,त्र,ज्ञ,श्र) = 39
  • हर वर्ग में 5-5 व्यंजन (क, च, ट, त, प वर्ग)
  • अंतस्थ — य, र, ल, व
  • ऊष्म — श, ष, स, ह
  • आयोगवाह — अनुस्वार, विसर्ग, अनुनासिक

अभ्यास प्रश्न

  1. हिंदी में कुल मूल स्वर कितने माने जाते हैं?
  2. संयुक्त व्यंजन कौन-कौन से हैं?
  3. त-वर्ग को वर्त्स्य क्यों कहा जाता है?
  4. घोष व्यंजन का एक उदाहरण दीजिए।
  5. उत्क्षिप्त व्यंजन कौन-कौन से हैं?

(उत्तर ऊपर दी गई तालिकाओं में उपलब्ध हैं — स्वयं हल करके अभ्यास करें।)

Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience