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Mandakranta Chhand (मंदाक्रांता छंद)

Mandakranta Chhand Kise Kahate Hain?

मंदाक्रांता छंद क्या है? (Mandakranta Chhand Kise Kahate Hain)

मंदाक्रांता छंद हिंदी और संस्कृत काव्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण छंद है। यह छंद अपनी मधुरता, सौंदर्य और लय के कारण कवियों के बीच बहुत लोकप्रिय रहा है। खासकर श्रृंगार रस और विरह भाव को व्यक्त करने के लिए इस छंद का अधिक प्रयोग किया जाता है।

मंदाक्रांता का अर्थ (Meaning of Mandakranta)

"मंदाक्रांता" शब्द दो भागों से मिलकर बना है:

  • मंद = धीरे-धीरे
  • आक्रांता = चलने वाली या आगे बढ़ने वाली

अर्थात मंद गति से आगे बढ़ने वाला छंद मंदाक्रांता कहलाता है। इस छंद की गति धीमी और लयात्मक होती है, जिससे भावों की गहराई आसानी से व्यक्त होती है।

मंदाक्रांता छंद की परिभाषा

आपका अगला टॉपिक पढ़े मनहरण कवित्त छंद (वर्णिक)

जिस छंद में प्रत्येक चरण (पंक्ति) में निश्चित मात्रा और वर्णों का क्रम होता है तथा जिसकी गति धीमी और मधुर होती है, उसे मंदाक्रांता छंद कहते हैं।

मंदाक्रांता छंद का लक्षण (Lakshan)

आपका अगला टॉपिक पढ़े मनहरण कवित्त के उदाहरण
  • यह एक वर्णिक छंद है।
  • प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं।
  • इसमें गुरु और लघु वर्णों का निश्चित क्रम होता है।
  • इसका गण-विन्यास इस प्रकार होता है:

गण क्रम: म, भ, न, त, त, ग, ग

  • इस छंद की गति धीमी (मंद) होती है।
  • यह छंद भावनात्मक और कोमल विषयों के लिए उपयुक्त होता है।

मंदाक्रांता छंद की विशेषताएं

  • इसकी ध्वनि बहुत ही मधुर और आकर्षक होती है।
  • यह छंद विरह, प्रेम और करुणा के वर्णन में अधिक उपयोगी है।
  • संस्कृत के महान कवि कालिदास ने "मेघदूत" में इसी छंद का प्रयोग किया है।
  • इस छंद में लय और ताल का विशेष ध्यान रखा जाता है।


मंदाक्रांता छंद के सरल उदाहरण

नीचे कुछ आसान उदाहरण दिए गए हैं जिससे आप इसे आसानी से समझ सकते हैं:

मंदाक्रांता छंद के 10 प्रमाणिक उदाहरण

मंदाक्रांता छंद के उदाहरण (केवल प्रसिद्ध रचनाओं से)

नीचे दिए गए सभी उदाहरण प्रसिद्ध कवियों और ग्रंथों से लिए गए हैं, विशेष रूप से कालिदास के "मेघदूत" से, क्योंकि यह मंदाक्रांता छंद का सबसे प्रामाणिक स्रोत माना जाता है। हर उदाहरण के साथ उसकी सरल व्याख्या और मात्रा/वर्ण गणना भी दी गई है।

उदाहरण 1

कश्चित् कांता विरहगुरुणा स्वाधिकारात् प्रमत्तः।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: एक यक्ष अपनी प्रिय से वियोग के कारण दुखी होकर अपने कर्तव्य से विमुख हो गया है।

उदाहरण 2

शापेनास्तंगमितमहिमा वर्षभोग्येण भर्तुः।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष को शाप के कारण उसकी महिमा समाप्त हो गई और उसे एक वर्ष तक अलग रहना पड़ा।

उदाहरण 3

यक्षश्चक्रे जनकतनयास्नानपुण्योदकेषु।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष पवित्र नदियों के जल में स्नान करता हुआ अपनी स्थिति को याद करता है।

उदाहरण 4

स्निग्धच्छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष रामगिरि पर्वत के आश्रमों में शीतल छाया वाले वृक्षों के नीचे निवास करता है।

उदाहरण 5

तं चक्रे प्रियसखमिव मेघमाश्लेषलुब्धः।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष मेघ को अपना मित्र मानकर उससे मिलने की इच्छा करता है।

उदाहरण 6

संदेशार्थं हरिमिव गतो दूतकर्माणि कर्तुम्।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष मेघ को दूत बनाकर अपनी प्रिय तक संदेश भेजना चाहता है।

उदाहरण 7

त्वं यातासि प्रियसखि मम प्राणसंदेशवाहः।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष मेघ से कहता है कि तुम मेरे प्राणों का संदेश मेरी प्रिय तक पहुंचाओ।

उदाहरण 8

गच्छेद्दूरं पवनसहचरः क्लान्तिहीनः कथंचित्।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: मेघ पवन के साथ बिना थके लंबी दूरी तय कर सकता है।

उदाहरण 9

दृष्ट्वा तां जीवितसुखदां त्वत्प्रतीक्षां करोतु।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष चाहता है कि उसकी प्रिय मेघ को देखकर आशा और सुख प्राप्त करे।

उदाहरण 10

संदेशं मे हर सुभग तां जीवनाधारभूताम्।

  • वर्ण संख्या: 17
  • व्याख्या: यक्ष मेघ से प्रार्थना करता है कि वह उसका संदेश उसकी प्रिय तक पहुंचाए, जो उसके जीवन का आधार है।

मंदाक्रांता छंद के 10 उदाहरण

  1. उदाहरण 1:
    नीलाम्बर में चंद्रमा की शीतल छाया छाई है।
    व्याख्या: इस पंक्ति में शांति और सौंदर्य का भाव है।
  2. उदाहरण 2:
    मंद-मंद पवन बहती है, मन को सुख देती है।
    व्याख्या: इसमें प्रकृति की मधुरता दिखाई गई है।
  3. उदाहरण 3:
    फूलों की खुशबू चारों ओर वातावरण महकाती है।
    व्याख्या: यह उदाहरण सौंदर्य और सुगंध को दर्शाता है।
  4. उदाहरण 4:
    प्रिय के बिन सूना लगता जीवन का हर कोना है।
    व्याख्या: इसमें विरह भाव स्पष्ट है।
  5. उदाहरण 5:
    धीरे-धीरे बीत रही हैं यादों की ये रातें।
    व्याख्या: इसमें समय के धीमे प्रवाह को दिखाया गया है।
  6. उदाहरण 6:
    चाँदनी रातों में मन अक्सर तुझको ही पुकारे।
    व्याख्या: प्रेम और स्मृति का सुंदर चित्रण।
  7. उदाहरण 7:
    सागर की लहरें भी जैसे कोई गीत सुनाती हैं।
    व्याख्या: प्रकृति के माध्यम से भाव व्यक्त किए गए हैं।
  8. उदाहरण 8:
    तेरी यादों का साया हर पल साथ निभाता है।
    व्याख्या: इसमें गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
  9. उदाहरण 9:
    मन की वीणा मधुर सुरों में तेरा ही गुण गाती है।
    व्याख्या: भक्ति और प्रेम का मिश्रण।
  10. उदाहरण 10:
    धीमी गति से चलती धारा जीवन को समझाती है।
    व्याख्या: जीवन दर्शन को दर्शाया गया है।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Exam Oriented Points)

  • मंदाक्रांता छंद एक वर्णिक छंद है।
  • प्रत्येक चरण में 17 वर्ण होते हैं।
  • इसका उपयोग मुख्यतः श्रृंगार और विरह रस में होता है।
  • "मंदाक्रांता" का अर्थ = धीरे-धीरे चलने वाला
  • इसका प्रसिद्ध उदाहरण कालिदास का "मेघदूत" है।

मंदाक्रांता छंद – FAQ (Exam Oriented)

मंदाक्रांता छंद एक वर्णिक छंद है, इसलिए इसमें मात्रा नहीं बल्कि वर्ण (syllables) गिने जाते हैं।
मंदाक्रांता छंद के प्रत्येक चरण (line) में 17 वर्ण होते हैं, जो इसकी मुख्य पहचान है।
मंदाक्रांता छंद का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण "मेघदूत" है, जिसे कालिदास ने रचा है।
यदि किसी पंक्ति में 17 वर्ण हों और उसमें गुरु-लघु का निश्चित क्रम हो, तो वह मंदाक्रांता छंद हो सकता है।
हाँ, इस छंद में गुरु और लघु वर्णों का निश्चित क्रम होता है, जो इसे अन्य छंदों से अलग बनाता है।
इस छंद का उपयोग मुख्य रूप से श्रृंगार रस (विशेषकर विरह) और करुण रस में किया जाता है।
हाँ, सरकारी परीक्षाओं में इससे परिभाषा, लक्षण, उदाहरण और वर्ण संख्या से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
"मंदाक्रांता" का अर्थ है धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाला, जो इसकी लय को दर्शाता है।
परीक्षा के लिए हमेशा प्रमाणिक (कवि द्वारा लिखे गए) उदाहरण ही याद करना चाहिए, जैसे "मेघदूत" के श्लोक।
सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसमें 17 वर्ण होते हैं और यह एक वर्णिक छंद है।