madhurya gun ka udaharan - माधुर्य गुण के उदाहरण
माधुर्य गुण के 10 उदाहरण
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“कहत नटत रीझत खीझत, मिलत खिलत लजियात।
भरे भौन में करत हैं, नैनन ही सौं बात।। ” — बिहारी
यहाँ प्रेमी-प्रेमिका की आँखों के माध्यम से होने वाली बातचीत का मधुर वर्णन है, इसलिए इसमें श्रृंगार रस और माधुर्य गुण स्पष्ट दिखाई देता है। -
“कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि।
कहत लखन सन राम हृदय गुनि।। ” — तुलसीदास
इन पंक्तियों में आभूषणों की मधुर ध्वनि का सुंदर चित्रण है। इसमें भाषा बहुत मधुर और सुरीली है, इसलिए यहाँ माधुर्य गुण दिखाई देता है। -
“बीती विभावरी जाग री।
अम्बर पनघट में डुबो रही तारा-घट ऊषा-नागरी।। ” — जयशंकर प्रसाद
यहाँ सुबह के सुंदर दृश्य का बहुत ही कोमल और मधुर वर्णन किया गया है। इसलिए इसमें माधुर्य गुण और श्रृंगार रस दिखाई देता है। -
“मंद-मंद मुरली बजावत अधर धरे,
मंद-मंद निकस्यौ मुकुंद मधुबन तें।। ”
इन पंक्तियों में भगवान कृष्ण की बांसुरी की मधुर ध्वनि का वर्णन किया गया है, जो भाषा को अत्यंत मधुर और आकर्षक बनाता है। -
“मधुर मधुर मेरे दीपक जलो।
युग-युग प्रतिदिन प्रतिपल प्रियतम, पथ का प्रदीप जलने दो।। ” — महादेवी वर्मा
यहाँ प्रेम और भावनाओं की कोमल अभिव्यक्ति है। शब्दों की मिठास के कारण यह माधुर्य गुण का सुंदर उदाहरण है। -
“अधर धरत हरि के परत, ओठ दीठि पट जोति।
हरित बाँस की बाँसुरी, इन्द्रधनुष-सी होति।। ” — बिहारी
इन पंक्तियों में भगवान कृष्ण की बांसुरी का बहुत ही सुंदर और मधुर वर्णन किया गया है। -
“चलतु मृदु-वाणी हृदय-सुखदं रसिकान्दन।। ”
इस पंक्ति में कोमल शब्दों का प्रयोग हुआ है जो मन को सुख और शांति प्रदान करते हैं। -
“प्यारे तिहारे निहार बिना, अँखियां दुखियां नहीं मानती हैं।। ”
यहाँ प्रेम की भावना का मधुर और कोमल वर्णन है, इसलिए यह माधुर्य गुण का अच्छा उदाहरण है। -
“पीके फूटे आज प्यार के, पानी बरसा री।
हरियाली छा गयी, हमारे सावन सरसा री।। ”
इन पंक्तियों में सावन और प्रेम का मधुर चित्रण किया गया है, जो भाषा को बहुत ही सुरीला बनाता है। -
“सुख-दुख के मधुर मिलन से, यह जीवन हो परिपूरण।
फिर घन में ओझल हो शशि, फिर शशि से ओझल हो घन।। ”
यहाँ जीवन के भावों का बहुत ही सुंदर और शांत वर्णन किया गया है, जिससे माधुर्य गुण प्रकट होता है।
1.उदाहरण
2.उदाहरण
3.उदाहरण
4.उदाहरण
5.उदाहरण
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7.उदाहरण
8.उदाहरण
9.उदाहरण
10.उदाहरण
निष्कर्ष
इन सभी उदाहरणों में कोमलकांत पदावली, मधुर ध्वनि, अनुप्रास अलंकार और कोमल भाव का प्रयोग किया गया है। इसी कारण इन पंक्तियों में माधुर्य गुण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। माधुर्य गुण काव्य को सरल, सुरीला और हृदय को आनंद देने वाला बना देता है।