vatsalya ras udaharan
vatsalya ras udaharan-वात्सल्य रस का उदाहरण
वात्सल्य रस में माता-पिता का अपने बच्चे के प्रति प्रेम, स्नेह और ममता प्रकट होती है। यह रस विशेष रूप से माता और बच्चे के संबंध में दिखाई देता है। हिंदी और भक्ति साहित्य में भगवान कृष्ण और माता यशोदा के प्रसंगों में वात्सल्य रस के सुंदर उदाहरण मिलते हैं।
वात्सल्य रस के 10 उदाहरण
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उदाहरण 1
“यशोदा हरि पालने झुलावै,
हलरावै दुलरावै अति सुख पावै।” — सूरदास
इन पंक्तियों में माता यशोदा भगवान कृष्ण को पालने में झुला रही हैं और उन्हें प्यार से दुलार रही हैं। माँ का अपने छोटे बच्चे को पालने में झुलाना और उससे आनंद प्राप्त करना माता के गहरे प्रेम और ममता को दर्शाता है। इस प्रकार यहाँ वात्सल्य रस की अत्यंत सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। -
उदाहरण 2
“मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो,
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि मेरे मुख लपटायो।” — सूरदास
इन पंक्तियों में बालक कृष्ण अपनी माँ यशोदा से मासूमियत से कह रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया और उनके मित्रों ने झूठा आरोप लगाया है। माता और बच्चे के बीच की यह सरल और स्नेहपूर्ण बातचीत वात्सल्य रस को अत्यंत सुंदर रूप में प्रकट करती है। -
उदाहरण 3
“जसोदा हरि पालने झुलावै,
सोवत नंदलाल अति सुख पावै।” — सूरदास
इन पंक्तियों में माता यशोदा बालक कृष्ण को पालने में सुला रही हैं। माँ का अपने बच्चे को सुलाना और उसे प्रेम से देखना माता की ममता और स्नेह को प्रकट करता है। यह दृश्य वात्सल्य रस का स्पष्ट और सुंदर उदाहरण है। -
उदाहरण 4
“उधो! मोहि ब्रज बिसरत नाहीं,
नंद-जसोदा के प्रेम बिनु मन रहत नाहीं।” — सूरदास
इन पंक्तियों में कृष्ण ब्रज और माता-पिता के प्रेम को याद कर रहे हैं। नंद और यशोदा का कृष्ण के प्रति जो प्रेम है वह वात्सल्य भाव का श्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है। इसलिए यहाँ वात्सल्य रस की अनुभूति होती है। -
उदाहरण 5
“कबहुँक उठि नंदलाल हँसावैं,
कबहुँक रोइ जसोदा धावैं।” — नंददास
इन पंक्तियों में बालक कृष्ण कभी हँसते हैं और कभी रोते हैं, और माता यशोदा तुरंत उन्हें संभालने के लिए दौड़ पड़ती हैं। माँ की यह चिंता और प्रेम उसके वात्सल्य भाव को प्रकट करता है। इस प्रकार यह वात्सल्य रस का सुंदर उदाहरण है। -
उदाहरण 6
“बाल मुकुंद खेलत अँगना,
जसोदा देखत हर्षित मनना।” — नंददास
इन पंक्तियों में बालक कृष्ण आँगन में खेल रहे हैं और माता यशोदा उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हो रही हैं। माता का अपने बच्चे को खेलते देखकर आनंदित होना वात्सल्य रस को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। -
उदाहरण 7
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की,
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की।” — लोकभक्ति पद
इन पंक्तियों में भगवान कृष्ण के जन्म पर नंद के घर में उत्सव मनाया जा रहा है। माता-पिता और पूरे परिवार का आनंद बालक के प्रति प्रेम और स्नेह को दर्शाता है। यह भी वात्सल्य भाव का सुंदर उदाहरण है। -
उदाहरण 8
“किलकत कान्ह घुटुरुनि आवत,
माता देखि हर्षित भावत।” — सूरदास
इन पंक्तियों में बालक कृष्ण घुटनों के बल चलते हुए आ रहे हैं। माता यशोदा उन्हें देखकर अत्यंत प्रसन्न हो रही हैं। बच्चे की छोटी-छोटी क्रियाएँ माता को आनंद देती हैं, इसलिए यहाँ वात्सल्य रस की अनुभूति होती है। -
उदाहरण 9
“कबहुँक किलकत हँसत नंदलाला,
जसोदा देखि हरषि मतवाला।” — सूरदास
इन पंक्तियों में बालक कृष्ण हँसते और खेलते दिखाई दे रहे हैं, और माता यशोदा उन्हें देखकर आनंद से भर जाती हैं। माता का अपने बच्चे की हँसी से प्रसन्न होना वात्सल्य रस का स्पष्ट उदाहरण है। -
उदाहरण 10
“जसोदा हरि को नहावन लेती,
स्नेह भरे अंचल जल देती।” — सूरदास
इन पंक्तियों में माता यशोदा बालक कृष्ण को स्नान करा रही हैं। माँ का अपने बच्चे की देखभाल करना उसके प्रेम, स्नेह और ममता को प्रकट करता है। इस प्रकार यहाँ वात्सल्य रस की अत्यंत कोमल अभिव्यक्ति मिलती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
सरकारी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि वात्सल्य रस का सबसे सुंदर वर्णन किस कवि ने किया है। इसका उत्तर है सूरदास। सूरदास ने भगवान कृष्ण के बाल रूप और माता यशोदा के प्रेम का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण चित्रण किया है।
इसलिए “यशोदा हरि पालने झुलावै” और “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो” वात्सल्य रस के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।
स्वनिर्मित वात्सल्य रस का उदाहरण
- 1. माँ अपने बच्चे को गोद में लेकर प्यार करती है।
- 2. पिता अपने बेटे को चलना सिखाता है।
- 3. माँ बच्चे को लोरी सुनाकर सुलाती है।
- 4. यशोदा कृष्ण को पालने में झुलाती है।
- 5. माँ अपने बच्चे को खाना खिलाती है।
- 6. पिता अपने बच्चे को कंधे पर बैठाकर घुमाता है।
- 7. माँ बच्चे को प्यार से दुलारती है।
- 8. बच्चा रोता है तो माँ उसे चुप कराती है।
- 9. माँ बच्चे के सिर पर हाथ फेरती है।
- 10. पिता अपने बेटे को पढ़ाई के लिए प्रेरित करता है।
- 11. माँ बच्चे को नहलाकर साफ कपड़े पहनाती है।
- 12. पिता अपने बच्चे को स्कूल छोड़ने जाता है।
- 13. माँ अपने बच्चे को बीमार होने पर देखभाल करती है।
- 14. बच्चा खेलते-खेलते गिर जाता है तो माँ उसे उठाकर संभालती है।
- 15. माँ बच्चे को कहानी सुनाती है।
- 16. पिता अपने बेटे को साइकिल चलाना सिखाता है।
- 17. माँ बच्चे को प्यार से गले लगाती है।
- 18. बच्चा मुस्कुराता है तो माँ खुश हो जाती है।
- 19. माँ बच्चे को प्यार से चूमती है।
- 20. माता-पिता अपने बच्चे की सफलता पर गर्व करते हैं।
एक प्रसिद्ध उदाहरण (सूरदास)
"मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो।"
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि, मेरे मुख लपटायो।।
इस पद में बाल कृष्ण अपनी माँ यशोदा से माखन खाने का आरोप नकारते हैं। इसमें माँ और बच्चे के बीच प्रेम और ममता का सुंदर चित्रण है, इसलिए यह वात्सल्य रस का प्रसिद्ध उदाहरण है।
FAQ
वात्सल्य रस वह रस है जिसमें माता-पिता का अपने बच्चे के प्रति प्रेम, ममता और स्नेह प्रकट होता है। साहित्य में जब माता अपने बच्चे को दुलारती है, उसे गोद में लेती है या उसकी देखभाल करती है, तब वहाँ वात्सल्य रस माना जाता है।
वात्सल्य रस का स्थायी भाव ममता होता है। माता-पिता के हृदय में बच्चे के प्रति जो स्नेह और प्यार होता है वही वात्सल्य रस का मुख्य भाव है।
वात्सल्य रस का प्रसिद्ध उदाहरण सूरदास की पंक्ति है —
“यशोदा हरि पालने झुलावै, दुलराइ मल्हावै।”
इसमें माता यशोदा का बाल कृष्ण के प्रति प्रेम और दुलार दिखाई देता है।
- माँ अपने बच्चे को गोद में लेकर प्यार से झुलाती है।
- पिता अपने छोटे बच्चे को चलना सिखाता है।
वात्सल्य रस मुख्य रूप से माता-पिता और बच्चे के संबंध में दिखाई देता है। भक्ति साहित्य में यह रस विशेष रूप से माता यशोदा और बाल कृष्ण के प्रसंगों में मिलता है।